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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रेम और साधना

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                                   प्रेम एक विषय नहीं यह एक साधना है।  सामान्यतः देखा गया है कि प्रेम को कोई भी परिभाषित नहीं कर पाता क्यूंकि प्रेम परिभाषित करने हेतु शब्दों की नहीं भावनाओं कि आवश्यकता  होती है। हमारा सम्पूर्ण जीवन प्रेम पर आधारित है कहूं तो हमारी उत्पत्ति ही प्रेम से हुई है।  प्रेम जीवन का सारांश है।  हमारा जीवन प्रेम से उत्पन्न हुआ प्रेम से ही अग्रसर है और प्रेम पर ही समाप्त  हो जाता है। प्रेम भावनाओं का ऐसा  संयोजन है जिसे हम बिना संकोच के व्यक्त कर देते हैं।  आपके  फ़ोन से आप प्रेम करते हैं अब मान  लीजिये वह फ़ोन आपके हाथ से गिर जाता  है तो उस समय उसके लिए भावनाओं का जो समायोजन आपके ह्रदय में होगा वही प्रेम है।  आज के युग में आपके चलंत दूरभाष यंत्र (फ़ोन) से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। हम प्रेम के भाव को कहीं भी समझ सकते हैं प्रकृति द्वारा निर्मित हर जीव  से हमें प्रेम हो सकता है और प्रकृति द्वारा निर्मित हर जीव हमसे ...

राजनीति और हमारा धर्म

                                   दुखद और भावविभोर कर देने वाली घटना पर अब सबकी टिप्पणियां आने लगी  हैं सब स्वयं को निर्दोष और देश भक्त साबित करने  में लग  गए।  योगेंद्र यादव जिन्होंने  पहले कहा कि किसान गणतंत्र दिवस पर परेड करेगा पहली बार सारे  के सारे  बेरिकेट  खुलेंगे और हम दिल्ली के अंदर जायेंगे।  आंदोलन अब और तीखा और जोरदार होगा और हिंसा होने के बाद कहा कि दुखद और निंदनीय घटना है। इसी शृंखला में राहुल गांधी , गुरुनाम सिंह चढूनी , अरुण बनकर , राकेश टिकैत, युद्धवीर सिंह, हन्नान मोल्लाह इत्यादि तथाकथित किसान नेताओ ने पूर्ण रूप से भड़काऊ  भाषण दिए।  चेतावनियां दी और ललकारा कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता। इन्होने पूरा प्रयास किया कि सरकार  गोलियां चलवाये और उससे इनकी राजनीती को  एक नया आयाम मिले। दिल्ली को तबाह करने से भी भयानक विचार  थे इनके जो सफल नहीं हो सके जिसके लिए मैं सुरक्षा कर्मियों एवं सरकार के धैर्य का दिल से अभिवादन...

मृत्यु एवं समय

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                                                                   मृत्यु और समय दोनों  ऐसे  सत्य हैं जिनका होना निश्चित है मृत्यु आनी  ही आनी  है और यह समय बीतेगा ही बीतेगा। मृत्यु का जो समय हमारे लिए निश्चित है उसका पूर्वानुमान हम लोगों को कदाचित  नहीं और मृत्यु एक अटल सत्य  है।  अपने जीवित रहते  ही सुनिश्चित करें मृत्यु के समय आप स्वयं से संतुष्ट हो । समय अपनी गति से आगे बढ़ता है समय यह नहीं देखता कि आप रुक गए हैं या आप विश्राम कर रहे हैं।  उसका कार्य निरंतर चलना है और वह अपना कार्य पूर्ण निष्ठा से कर रहा है यदि हम समय के साथ नहीं हैं तो यह दोष पूर्ण रूप से हमारा है।  हम सफल हैं या नहीं यह महत्वपूर्ण नहीं है परन्तु हम स्वयं के कार्यों से संतुष्ट हैं या नहीं यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है।  समय हमारा परिचय सदैव उन बातों से करवाता है जिनसे  हम स्वयं को स्थिर कर पा...

२६ जनवरी २०२१

                     आज मैं बहुत भारी दिल से यह लेख लिख रहा हूँ।  कह सकता हूँ की आज आँखों में खून दौड़ रहा है।  आज २६ जनवरी २०२१ इसे  देश के लिए काला  दिन भी कह सकता हूँ।  हमारी मानसिकता इतनी क्षीण हो गयी गयी है कि हम अपने देश के स्वाभिमान को भी जिन्दा नहीं रख पा रहे। सही में मुझे आज अपने लेखों पर गर्व है कि मैं मानसिक स्थिति को सही करने हेतु लेख लिख रहा हूँ उनसे कितने परिवर्तन आएंगे नहीं जानता, लिख इसलिए रहा हूँ कि सच में मुझे लगने लगा है कि हम सब मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गए हैं।  हम अपने स्वार्थों की पूर्ती के लिए मनुष्य से जानवर बनने में भी कदाचित नहीं हिचक रहे। हम आज की घटना पर सरकार की असफलता  के लिए हंस रहे हैं छी घृणा हो रही आज मुझे ये सब देख कर कि कुछ लोग सिर्फ इसलिए हिंसा कर रहें हैं कि उन्हें सरकार का विरोध करना है।  क्या यह  संस्कृति और सभ्यता  हमारी है नहीं कभी नहीं यह हमारी नहीं यह पडोशी देशों कि सभ्यता रही है जो हमारे यहाँ कहाँ से आयी ?  क्या इस सभ्यता को यहाँ प्...

चरित्र और व्यक्तित्व

                                      चरित्र मनुष्य के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को प्रकट करता है। यह दोनों सामानांतर हैं।  जितना उत्तम व्यक्ति का चरित्र होगा उतना ही उत्तम उसका व्यक्तित्व।  आज विज्ञानं बहुत प्रगतिशील है परन्तु इसके पश्यात भी कुछ बातें इंसान में ऐंसी है जिसका विश्लेषण करने हेतु कोई प्रयोगशाला नहीं बना पाया।  हम अपने शरीर को अनेकानेक प्रकार कि जांचों से उसकी स्थिति का आंकलन  तो कर सकते हैं परन्तु भावनाओं हेतु ऐंसा कुछ भी नहीं।  व्यक्तित्व का  निर्माण हमारी भावनाओं एवं हमारी शिक्षा पर निर्भर करता है।  हमारे शिक्षकों एवं अभिभावकों  द्वारा प्रदान ज्ञान हमारी भावनाओं को सही दिशा प्रदान करता है और वह हमारे व्यक्तित्व को बनता  है परन्तु चरित्र का निर्माण हम स्वयं करते हैं ।   व्यव्हार हमें पैतृक सम्पति के रूप मैं मिल सकता है परन्तु चरित्र का निर्माण इंसान को स्वयं करना पड़ता  है।  आज के समय में यह सत्य है इसका अनुमान नहीं लगाया जा ...

अनुभव और चिंतन

                                              जीवन के बहुत सारे  अनुभव करने के पश्यात मात्र कुछ  ही बातें  समझ आती हैं अगर आपने  सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य किये हैं तो सदैव ही आपके जीवन में एक उमंग एवं जीने की अभिलाषा बनी रहती है। प्रत्येक दिन एक अच्छा काम करें प्रत्येक दिन ईश्वर को अवश्य  स्मरण करें। अपने माता पिता दोनों को ही आदर एवं उनकी सेवा करें।  किसी और के लिए अपनी दिनचर्या एवं अपने स्वार्थ हेतु किसी का दिन नष्ट ना करें। जीवन बहुत उपयोगी है इसका हर क्षण उपयोग में लाएं।  अपने हर क्षण को सदैव व्यवस्थित एवं क्रियाशील रखें।  वो कार्य करें जिसको करने के पश्यात आनंद की अनुभूति होती हो।  नई नई बातों को सीखने का प्रयास करें। ज्ञान अर्जित करें एवं सकारात्मक दृष्टिकोण बनाये रखें।  यथासंभव प्रयास करें कि स्वयं पर नियन्त्र रख अपनी बातों को समझने हेतु आपके व्यव्हार में नम्रता एवं सम्मान का भाव हो।  आपके मन एवं मस्तिष्क में ...

मन चेतना और मंदिर

  मन   चेतना और मंदिर   सर्वप्रथम इसको समझने की कोशिश करते हैं कि मन   चेतना और मंदिर तीनो एक साथ आते हैं तो इसका भावार्थ किस सन्दर्भ में है ।   मन हमारी मानसिक स्थिति   को दर्शाता है जो कि सबसे पहला पड़ाव है इसके बाद चेतना यह दर्शाता है की मन किस अवस्था में है कह सकते हैं कि हमारी किसी वस्तु जीव या प्रकृति की किसी भी चीज़ के लिए   सोच हमारी चेतना है।   अपने आस   पास के तत्वों का बोध होना उन्हें समझने तथा उनकी बातों का मूल्यांकन करने की शक्ति   का नाम चेतना है।   भारतीय वेद , शास्त्र एवं सभ्यता के अनुसार अगर देखा जाये तो चेतना को आध्यात्म के साथ ही समझा जा सकता है कह सकते हैं कि सारे ब्रह्माण्ड में जो परम शक्ति व्याप्त है जो कि प्रकृति के कण कण में विध्यमान   है उसको ही चेतना कहते है।   हमारा   शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है और पांच तत्वों में ही विलीन हो जाता है ये मै...