प्रेम और साधना

 






                                 प्रेम एक विषय नहीं यह एक साधना है।  सामान्यतः देखा गया है कि प्रेम को कोई भी परिभाषित नहीं कर पाता क्यूंकि प्रेम परिभाषित करने हेतु शब्दों की नहीं भावनाओं कि आवश्यकता  होती है। हमारा सम्पूर्ण जीवन प्रेम पर आधारित है कहूं तो हमारी उत्पत्ति ही प्रेम से हुई है।  प्रेम जीवन का सारांश है।  हमारा जीवन प्रेम से उत्पन्न हुआ प्रेम से ही अग्रसर है और प्रेम पर ही समाप्त  हो जाता है। प्रेम भावनाओं का ऐसा  संयोजन है जिसे हम बिना संकोच के व्यक्त कर देते हैं।  आपके  फ़ोन से आप प्रेम करते हैं अब मान  लीजिये वह फ़ोन आपके हाथ से गिर जाता  है तो उस समय उसके लिए भावनाओं का जो समायोजन आपके ह्रदय में होगा वही प्रेम है।  आज के युग में आपके चलंत दूरभाष यंत्र (फ़ोन) से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। हम प्रेम के भाव को कहीं भी समझ सकते हैं प्रकृति द्वारा निर्मित हर जीव  से हमें प्रेम हो सकता है और प्रकृति द्वारा निर्मित हर जीव हमसे प्रेम कर सकता है।  प्रेम की अनुभूति हर स्थान पर व्याप्त है कण कण में विद्यमान है तो हम यह नहीं कह सकते कि हम इससे अनभिज्ञ हैं।  यह हमारे जीवन मृत्यु तक स्वचलित और केंद्र बिंदु है।  

 

                              अब इससे जनित समस्याओं पर आते हैं यदि हम  मनुष्यों से अत्यधिक प्रेम करते हैं तो वह मोह का रूप ले लेता है यदि स्वयं से अत्यधिक प्रेम हो तो अहंकार बन जाता है यदि वस्तुओं से अत्यधिक प्रेम करते हैं  तो लालच को जन्म देती है और यदि प्रेम कि अत्यधिकता हो जाती है तो ईर्ष्या का बोध होने लगता  है। ईर्ष्या, मद, मोह, क्रोध यह सभी प्रेम के साथ ही उत्पन्न होते हैं  सभी समस्याओं का कारण भी प्रेम है परन्तु प्रेम बिना जीवन की परिकल्पना भी असंभव है। यह ठीक  उसी तरह है जिस तरह पानी में रहकर मगर से बैर नहीं किया जा सकता।  यदि आप संसार में हैं तो यह संभव नहीं कि आपको प्रेम की अनुभूति न हो। प्रेम के बिना किसी भी वस्तु का कोई अस्तित्व नहीं। वस्तुतः देखा गया है कि प्रेम हमारी स्वच्छंद एवं स्वाधीनता की मूलभुति प्रकृति को नष्ट कर देता है  इसलिए हमें ऐसे  प्रेम कि आवश्यकता है जो हमारी स्वछन्द एवं स्वाधीनता की प्रकृति को नष्ट न करे। प्रेम जब भी आवश्यकताओं के रूप में जन्म लेगा वह आपके लिए बहुत प्रकार की समस्याओं को साथ लेकर आएगा। छोटों के प्रति आपका भाव बड़ों के प्रति आदर एवं सम्मान किसी भी वस्तु हेतु आपकी भावनाओं का संग्रह सब कुछ प्रेम है।  हमारी पसंद और नापसंद सब हमारे प्रेम की अभिव्यक्तियाँ हैं। 


                              यदि आप पूछें कि प्रेम का क्या आशय है तो जहाँ आशय है वहां प्रेम कहाँ है फिर तो एक आवश्यकता है।   विवाह हेतु  तो दो लोगों की आवश्यकता होती है  परन्तु प्रेम एक होना सिखाता है।  जो विवाह  को आवश्यकता समझ कर करता है उनकी प्रेम सम्बंधित आवश्यताएं  पूर्ण नहीं होती क्यूंकि प्रेम कदाचित  आवश्यकता नहीं है।  प्रेम में सब कुछ एक हो जाता है।  प्रेम अटल एवं अमर है यदि फिर भी प्रेम होता है और वह प्रेम टूट जाता है तो कदाचित यह भौतिक सुख सुविधाओं से निहितार्थ है तो इस  प्रेम को प्रेम नहीं स्वार्थ कहा जा सकता है।  प्रेम किसी भी विवशता के अधीन नहीं चलता प्रेम का भाव यदि अंतरात्मा से दिव्य रूप में हैं तो ही सार्थक है।  


                              प्रेम का दिव्य होना कर्म, मन और वाणी कि सुंदरता का बोध करवाता है यदि प्रेम आपके अंदर दिव्यांश रूप में है तो आपकी वाणी , मन और कर्म तीनो दूसरों के लिए एवं स्वयं के लिए  फलीभूत हैं अन्यथा उससे ईर्ष्या , मद , मोह , द्वेष , क्रोध एवं मानसिक अवसाद ही उत्पन्न होते हैं।  प्रेम को आवश्यकता नहीं साधना बनाइये आपके जीवन के बहुतेरे कष्ट स्वयं समाप्त हो जायेंगे। 


                              आज के सन्दर्भ में देखा जाये तो दिव्य प्रेम सम्बंधित आशंकाएं ही हैं।  हम एक दूसरे से किसी न किसी उद्देश्य  हेतु जुड़े हैं और उद्देश्य पूर्ती पश्यात हमें उनकी आवश्यकता नहीं।  हम प्रेम में तो हैं लेकिन उसका सही भावार्थ हमारे मन में नहीं।  हमारा प्रेम दूसरे को स्वतंत्रता देने के लिए नहीं बल्कि असुरक्षित होने और करने के लिए है।  हम उस पर अपना अधिकार समझ कर उसका जीवन  अपनी मासिकता अनुसार चलाना चाहते हैं जिसमे किसी को भी सफलता अर्जित नहीं होती। हमारा अधिकार प्रेमिका से प्रेम करना है हमारी  प्रेमिका उसका प्रतिउत्तर कैसे दे यह हमारा अधिकार नहीं फिर भी हम इसको अपना अधिकार क्षेत्र समझते हैं और इसीलिए आज हमें  प्रेम के प्रतुत्तर में  भी हमें मानसिक अवसाद की प्राप्ति होती है। 


                              अतः समझने का प्रयास करें कि स्वतंत्रता का भाव सबसे अच्छा  भाव है। अपने प्रेम को अपनी साधना बनाइये ना कि  आवश्यकता ।  स्वतंत्रता के प्रभावों के बारे में अगले लेख में चर्चा होगी। 


आपके स्वास्थ्य कि मंगल कामना के साथ। 



आशीष भट्ट 

मार्केटिंग मैनेजर - सेलब्लेस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड 

सदस्य - शिवालिक उत्तरांचल विकास समिति



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