रक्षात्मक या आक्रामक
अनुभव से प्राप्त ज्ञान आवश्यक नहीं कि स्वयं के अनुभवों से ही ग्रहण किया जाये कभी कभी हम यह सब दूसरों के अनुभवों से भी ग्रहण कर सकते हैं। सामान्यतः हमारे आस पास ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनका हमसे सम्बन्ध नहीं होता परन्तु वह हमें कुछ ना कुछ सिखा देती हैं अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन सब से क्या सीख पाते हैं। आज का समय बहुत व्यस्त होने के साथ साथ बहुमुखी प्रतिभावान होने का भी है परन्तु हम इसमें लगातार निष्क्रिय होते चले जा रहें हैं स्वाभाविक है कि यह सब हमारी आदतों में हो रहे बदलावों की भिनंता एवं तीव्र तरह से बदलते हमारे निर्णयों का परिणाम है। देखा जाये तो हमारा व्यव्हार आक्रामक एवं कार्य रक्षात्मक हैं जबकि हमें इसके विपरीत होना चाहिए। हमारे कार्य आक्रामक एवं व्यव्हार रक्षात्मक होना चाहिए। ...