मन
खूबसूरत मन कह रहा था मुझसे, तू किसको ढूंढ रहा है। अंधेरा तेरे जीवन का तो, तेरे ही अंदर ही बसा है, ना कर तू वो कोशिश जिससे हार जाए, कर खुद को समझने की कोशिश तांकि, अंदर का अंधेरा भाग जाए। तेरी ख्वाइशों पर पंख है इतने, कि कोई भी दूर तुझसे चला जाए, इनको थोड़ा सा संभाल तू तांकि सब तेरे करीब आएं। ज़िंदगी रह नही सकती तेरी गुलाम होकर, समय भी तेरा निकल रहा इसको इस्तेमाल कर सामने बर्बादी खड़ी है तेरी, परिंदों की तरह उड़ान भर कर। न वक़्त को यूं अपना मोहताज़ बना तू, संभल जा अभी भी थोड़ा सुधर जा तू।