लाउड हो तुम ( M )
भारत देश एक ऐसी सांस्कृतिक धरा हैं जिसका वर्णन यदि प्रारम्भ किया जाये तो अंत होने का कोई निश्चित समय नहीं इसका वर्णन ही अन्नत हैं। सर्वे भवन्तु सुखिनः से लेकर शठे शाठ्यम समाचरेत तक का पाठ पढ़ाने वाली हमारी संस्कृति का अनुभव कितना प्राचीन होगा उसका आभास हमारे सौर मंडल की उत्कृष्ट विज्ञान बोध करवाती हैं। विश्व के कल्याण के लिए कामना करने वाली संस्कृति से यदि किसी को बैर हैं तो यह संस्कृति का नहीं अपितु उन लोगों का दोष हैं जो इसको समाप्त करना चाहते हैं। लगातार होते सांस्कृतिक हमले शांति तो भंग कर ही रहे साथ ही हिन्दुओं को सनातन बचाने हेतु प्रेरित भी कर रहे। यहाँ यदि मैं बचाने शब्द का प्रयोग कर रहा हूँ तो इसका अभिप्राय आत्मरक्षा होता हैं और आत्मरक्षा म...