लाउड हो तुम ( M )




                                                  भारत देश एक ऐसी सांस्कृतिक धरा हैं जिसका वर्णन यदि प्रारम्भ किया जाये तो अंत होने का कोई निश्चित समय नहीं इसका वर्णन ही अन्नत हैं।  सर्वे भवन्तु सुखिनः से लेकर शठे शाठ्यम समाचरेत तक का पाठ पढ़ाने वाली हमारी संस्कृति का अनुभव कितना प्राचीन होगा उसका आभास हमारे सौर मंडल की उत्कृष्ट विज्ञान बोध करवाती हैं। विश्व के कल्याण के लिए कामना करने वाली संस्कृति से यदि किसी को बैर हैं तो यह संस्कृति का नहीं अपितु उन लोगों का दोष हैं जो इसको समाप्त करना चाहते हैं। 

                                            लगातार होते सांस्कृतिक हमले शांति तो भंग कर ही रहे साथ ही हिन्दुओं को सनातन बचाने हेतु प्रेरित भी कर रहे। यहाँ यदि मैं बचाने शब्द का प्रयोग कर रहा हूँ तो इसका अभिप्राय आत्मरक्षा होता हैं और आत्मरक्षा में अभी मात्र बातों का संवाद चल रहा हैं।  परन्तु यही संवाद यदि बढ़ते बढ़ते युद्ध में परिवर्तित होता हैं तो इसका दोषी कौन आत्मरक्षा करने वाला या विश्वासघात करने वाला ? यदि हम अपनी संस्कृति से ही प्रेम करते हैं और हम अपने बच्चों को भी वही उपहार स्वरुप देना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या हैं ? अब कई लोग इस पर भी प्रश्न चिन्ह लगते हैं कि ऐसा कोई कर कहाँ रहा हैं।  मान लिया नहीं कर रहा तो कश्मीर क्या था ? कलकत्ता क्या था ? केरल क्या था ? बंगाल क्या हैं ? राजस्थान क्या हैं ? रामनवमी पर पत्थर क्या हैं ? हनुमान जी की शोभायात्रा पर पत्थर क्या हैं ? देश की सेना पर पत्थर क्या हैं ? अलगाववाद क्या हैं ? अल्पसंख्यक क्या हैं ? सरकारों द्वारा बनाये जा रहे कानूनों के विरुद्ध हिंसक आंदोलन क्या हैं ? गजवा ए हिन्द क्या हैं ? अल्लाह के अलावा कोई दूसरा नहीं इसका लाउड स्पीकर पर प्रदर्शन क्या हैं ? हिन्दू मंदिरों में लगातार अतिक्रमण यह क्या हैं ? अखंड भारत पर चिढ़ने वाले लोग और हिंसा करना ये क्या हैं ? हमारी सांस्कृतिक धरोहरों के जीर्णोधार होने पर सवाल खड़े करना ये क्या हैं ? हमारी निकिता बहन जैसी हत्याओं पर मौन रहने वाले और हत्याएं करना यह क्या हैं ? शादी करने के पश्यात हिन्दू बहनो का अटेची में मिलना ये क्या हैं ? बहुत प्रश्न हैं जो यदि हम स्वयं से करें तो उनका उत्तर मात्र सही इतिहास ही हमें दे सकता हैं। 

                                           इतने के पश्यात भी यदि किसी को सनातन बचाने हेतु हिन्दुओं का प्रतिउत्तर असमान्य लगता हो तो यह उस मानसिकता को दर्शाता हैं कि वह स्वयं सनातन संस्कृति के विरुद्ध हैं। हमें सदैव यह बोल कर चुप करवाने वाले लोग कि यह देश सेक्युलर हैं वह यह भी बताएं कि यदि सेक्युलर हैं तो इस देश में मुस्लिम छोड़ बाकी सभी ही सेक्युलर रहें यह न्याय संगत हैं? क्या यहाँ मुस्लिम सेक्युलर नहीं हो सकता ? यदि नहीं तो हो सकता तो इसका सरल मार्ग क्या हैं कि वह यहाँ हमारे बीच ना रहे ? क्यूंकि मुस्लिम राष्ट्र तो हम उन्हें १९४७ में ही दे चुके हैं अब यह जो हैं वह हिन्दुओं का हैं और हिन्दू संस्कृति के अनुसार चलेगा।  यदि हमारे साथ यहाँ भारत भूमि पर रह रहे हो तो यहाँ की संस्कृति एवं सभ्यता का सम्मान आवश्यक हैं जो नहीं कर सकता उसके लिए पाकिस्तान एवं बांग्लादेश जाने हेतु स्वतंत्रता हैं।  यहाँ रहने हेतु वह बाध्य नहीं हैं। 

                                                    पाकिस्तानी सेना के एक जर्नल ने सही कहा था कि भारत में हमने विभाजन के बाद भी जगह जगह पाकिस्तान बना दिए हैं जो कि समय आने पर हमारे लिए कार्यरत होंगे और उसकी बातों की सत्यता आज प्रामाणिक हो रही हैं। अब पत्थर फेंकने एवं कोर्ट के आदेशों के विपरीत कार्य करने वाले मुस्लिम यह सिद्ध कर रहे कि उनके सम्बन्ध पाकिस्तान से बहुत गहरे हैं।  भारत पाकिस्तान युद्ध में भी मुस्लिम रेजिमेंट ने यह कह कर हथियार डाल दिए कि हम मुस्लिम से युद्ध नहीं करेंगे अर्थात उनका पाकिस्तान प्रेम उन्हें विवश कर रहा था कि वह युद्ध ना करें। आज भी पाकिस्तान प्रेम की यह विवशता प्रत्यक्ष दिखाई देती हैं। इस बात की गहराई यदि समझनी हो तो यह अभी पत्थर बाजी की घटना हो रही हैं उससे समझा जा सकता हैं कि यहाँ कितने पाकिस्तानी इनएक्टिव थे जो इस समय एक्टिव हैं। 

                                             दिल्ली जहांगीर पुरी की घटना इसी का एक रूप हैं शोभा यात्रा तो सालों से निकल रही हैं और सहस्र वर्षों तक निकलती रहेंगी परन्तु यह मजहबी दहशतगर्दी का सन्देश क्या हैं ? कहीं यह हिन्दुओं को उस स्थिति तक तो नहीं ले जा रहे कि हिन्दू बिना कोई और पाकिस्तान बने इनका समूल नाश कर दे ? अब अगर यह स्थिति बनती हैं तो इसका उत्तरदायी कौन ? इस प्रकार के व्यव्हार से यह लोग अपनी मुहर्रम एवं ताजिया यात्रा बिना पत्थर खाये निकाल पाएंगे ? यह कोई अतिशयोक्ति नहीं कि वह समय समीप हैं जब ये लोग स्वयं कि छाती पीट रहे होंगे और पत्थर इनके सर फोड़ रहे होंगे।  मजहबी दहशतगर्दी को उत्पन्न करने वाला कौन हैं ? कहीं यह इनकी मानसिकता में भरा जा रहा वो जहर तो नहीं जो इनकी आसमानी किताब इनको दे रही हैं ? इन प्रश्नो के उत्तर जानने का अब में इच्छुक नहीं परन्तु यह प्रश्न इसलिए कर रहा कि आप भी सत्य से अवगत हो पाएं। मजहबी दशहतगर्दी और मजहबी आतंकवाद इन दो समस्याओं से पूरा विश्व परेशान है तो क्या यह इसका अंतिम चरण हैं ? यदि इसको अंतिम रूप देना है तो हम सबको जागने की आवश्यकता हैं वैसे हम पहले से बहुत जागृत हुए हैं और अच्छी तरह अपने अपने कार्यों में कार्यरत हैं परन्तु अब समय जल्दी अगले कदम का हैं।  थोड़ा भी बिलम्ब हमसे और हिन्दुओं की बलि मांग सकता हैं।  बांग्लादेशी रोहियांगी यदि हनुमान शोभा यात्रा पर पत्थर मारने से नहीं झिझकते तो बांग्लादेश को यहाँ शरण देने के लिए सर्वप्रथम हम स्वयं दोषी हैं और यदि अब इनको यहाँ से भागने के लिए भी प्रयासरत नहीं है तो भी हम दोषी हैं। अभी हम संख्या में अधिक हैं तो अपना घर और तलवारों के युद्ध में दोनों तरफ का सामंजस्य आसानी से बिठा सकते है परन्तु संख्या कम होने के पश्यात सबके पास तलवार देना हमारी विवशता हो जाएगी। उस समय हमारे युद्ध और आर्थिक स्थिति में तालमेल बिठाना लगफग असंभव हो जायेगा।  वैसे तो हम वीर राणा जी की भारत भूमि से हैं घास की रोटी खा कर भी देश सेवा कर सकते हैं परन्तु यदि इस स्थिति को प्रारम्भ में ही संभाला जा सकता है तो क्यों ना संभाल लिया जाये। 

                                   सरकार देश हित कार्यों में अपना पूर्ण योगदान दे रही है क्या हम लोग अपने आस पास अपनी भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकते ? हिन्दू राष्ट्र, अखंड भारत , सामान कानून संहिता, जनसँख्या नियंत्रण कानून, CAA , NRC जैसे कानून बनना अति आवश्यक हैं और इसके लिए हमें अब सरकार से हर माध्यम से वार्तालाप करके दबाब बनाकर इन  कार्य को  अंतिम चरण तक पहुँचाने की अपनी अपनी  भागीदारी सुनिश्चित कर पूर्ण करना  होगी। अतः परस्पर साथ और एक होकर एक दूसरे का साथ दें।  हम इन कार्यों के लिए एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रहें। 

                              मै यह कदापि नहीं कह रहा कि आप अपनी सरकार का विरोध कर इन कार्यों को करवाएं, बल्कि अपनी बातों को किसी ना किसी माध्यम से सरकारों तक पहुँचाते रहिये।  यह विशेष रूप से याद रखें कि इस सरकार ने जितने कार्य हिन्दू धर्म के विस्तार हेतु किये हैं वह ना कभी हुए और ना कभी होंगे।  इसलिए अपना विश्वास बनाये रखें उनके हाथ बंधे अवश्य हैं परन्तु कोई ना कोई मार्ग वो निकाल ही लेते हैं।  माननीय नरेंद्र मोदी जी का जीवन पर्यन्त ऋणी रहूँगा कि उन्होंने हिन्दुओं में हिन्दू होने के लिए गर्व की अनुभूति करवाई। सभी सनातनियों का भी ह्रदय से आभार व्यक्त करूँगा कि उन्होंने निरंतर इस मार्ग पर माननीय मोदी जी का साथ दिया और इसी प्रकार देते रहेंगे यह आशा करता हूँ। माननीय योगी जी माननीय शिवराज चौहान जी माननीय हिमंता विशवा शर्मा जी माननीय पुष्कर धामी जी इन सभी का विशेष आभार  कि इन्होने बुरी परिस्थितियों में अच्छी कार्य प्रणाली अपनाकर गौरवान्वित किया है। आप सभी सनातनियों का विशेष धन्यवाद कि आपने इनके अच्छे कार्यों की सराहना की। 

जय श्रीराम।  जय हनुमान।  हर हर महादेव। 


 

     


टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही यथार्थ बात कही है आपने। जहा भी जनसंख्या 1/3 पार करती है वह ये हावी होने की कोशिश करते है और उस देश को मुस्लिम देश बनाने में लग जाते है,वही स्थिति भारत मे भी बनाने की कोशिश कर रहे है।

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    1. धन्यवाद श्रीमान। विचारणीय एवं गंभीर तथ्य है

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