समर्पण
जीवन में समस्याएं आती जाती रहती हैं हमारा व्यवहार और काम ही यह सिद्ध करता है कि हमने कितने समर्पण से यह लक्ष्य पाया है। ईश्वर आपको किसी न किसी माध्यम से प्रेरित करते हैं यह हमारे बुद्धि विवेक पर निर्भर करता है कि हम उसको कितना समझ पाते हैं। संकट की इस घडी में जब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है तो ईश्वर ने मार्ग प्रदर्शित किया " कार्य के लिए समर्पण " यही एक मात्र मार्ग है जिस पर अडिग रहकर परिस्थितियों से लड़ा जा सकता है। सम्पूर्ण सृष्टि हमें समर्पण एवं धैर्य का सन्देश देती है और हम आजीवन इन्ही महत्वपूर्ण बातों से दूरियां बना लेते हैं।
यह बात बताने का एक उद्देश्य है क्यूंकि जिस कार्य हेतु मैं चिंतित था उस कार्य को किसी का समर्पण लगभग कार्य पूर्ण करने की स्थिति में ले आया है जिसके लिए वह आभार तक व्यक्त नहीं करने देना चाहते मात्र यह बोलकर कि यह उनका कर्तव्य था परन्तु सत्य यह है कि यह उनके कर्तव्य से अधिक मेरी आवश्यकता थी।
यह घटना बहुत छोटी है परन्तु आपके जीवन की विषम परिस्थितियों में यह घटना आपको बहुत महत्वपूर्ण ज्ञान देती है। अपने कार्य हेतु समर्पण आपको सफलता दे सकती है और अपने कार्य के साथ साथ दूसरों के कार्यों हेतु समर्पण आपका सही मार्ग निर्धारित करती है।
यह परम सत्य श्रीमद भगवत गीता में अनेकों अनेक बार इसी समर्पण की व्याख्या अलग अलग मतों में की गयी है। प्रेम, कार्य, भक्ति, व्यक्तित्व, आनंद एवं संतुष्टि का भाव समर्पण से ही संभव है।
कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना ही है कि समर्पण का भाव रखिये ईश्वर सदैव आपके साथ हैं। ईश्वर द्वारा दिए जा रहे संकेतों को पहचानिये जीवन सरल होता जायेगा। स्वयं पर नियंत्रण करना सीखिए। अध्यात्म ही आपके जीवन को परम आनंदित कर सकता है दिखावे का जीवन मात्र दुःख संताप पैदा कर सकते हैं।

Boht sunder
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