मैं धरना प्रदर्शन हूँ। (Poem)
मैं राजनितिक गलियारे से पैदा हुआ एक ऐसा हथियार हूँ जो यदा कदा अपने उद्द्देश्यों को परिवर्तित करता हूँ। सामाजिक भावनाओं का मजाक बना राजनीती मैं करता हूँ कभी विरोध करने की तीव्र इच्छा तो कभी समर्थन करता हूँ । थाली का बैंगन हूँ साहब कहीं भी पलट सकता हूँ मैं धरना प्रदर्शन हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ। न कोई रोक है मुझे यहाँ, न ही किसी से डरता हूँ। मैं वो हूँ, जो कह देता हूँ वो करता हूँ। समाज को साथ लेकर फलता फूलता हूँ और फिर उसी समाज का विरोध करता हूँ। स्वयं को फलीभूत करता हुआ आज मैं तीव्रगामी दर्द निवारक से तुलना करता हूँ मैं मन चाहा रूप बदल सकता हूँ। आंसू बहा कर लोगों के सामने कमरे में जाकर हँसता हूँ मैं धरना प्रदर्शन हूँ साहब मैं कुछ भी कर सकता हूँ। राजनीती है मोह हमारा नेताओं की बात करता हूँ बहुत बनाये नेता यहाँ इंसा...