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मैं धरना प्रदर्शन हूँ। (Poem)

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मैं राजनितिक गलियारे से पैदा हुआ एक  ऐसा हथियार हूँ  जो यदा कदा अपने उद्द्देश्यों को परिवर्तित करता हूँ।  सामाजिक भावनाओं का मजाक बना राजनीती मैं करता हूँ  कभी विरोध करने की तीव्र इच्छा तो  कभी समर्थन करता हूँ ।   थाली का बैंगन हूँ साहब कहीं भी पलट सकता हूँ  मैं धरना प्रदर्शन हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ।                                        न कोई रोक है मुझे यहाँ, न ही किसी से डरता हूँ।  मैं वो हूँ, जो कह देता हूँ वो करता हूँ।   समाज को साथ लेकर फलता फूलता हूँ और फिर उसी समाज का विरोध करता हूँ।   स्वयं को फलीभूत करता  हुआ आज मैं  तीव्रगामी दर्द  निवारक से तुलना करता हूँ  मैं मन चाहा रूप बदल सकता हूँ।  आंसू बहा कर लोगों के सामने  कमरे में जाकर हँसता हूँ  मैं धरना प्रदर्शन हूँ साहब मैं कुछ भी कर सकता हूँ।  राजनीती है मोह हमारा नेताओं की बात करता हूँ  बहुत बनाये नेता  यहाँ इंसा...

संस्कृति एवं राष्ट्रवाद का प्रभाव

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                               बात बहुत पुरानी है हम सब मित्रगण बैठ कर संवाद कर रहे थे।  संवाद का विषय राष्ट्रगान था ये वो समय था जब हम बहुत छोटे थे और इतिहास के नाम पर सिर्फ अकबर औरंगजेब और मुग़ल शासन काल के अलावा कुछ और नहीं पता था तो उस समय की राष्ट्रगान पर चर्चा हमें उसकी गहराई का अंदेशा भी ना था।  इस प्रसंग की शुरुवात तब हुए जब रेडियो में राष्ट्रगान बजा और सभी एक दम से खड़े होकर राष्ट्रगान को सम्मान देने लगे।  सभी के दिलों में  उस समय राष्ट्रवाद का जो ज्वार भाटा था वह मुखमण्डल पर प्रतीत हो रहा था।  राष्ट्रगान खत्म हुआ और उस विषय पर चर्चा शुरू हुई।  सभी सम्मानित मित्रगण अपनी अपनी भावनाएं प्रस्तुत करने लगे सभी एक अलग जोश में थे और देश समर्पित बातों का बहुत भीषण उबाल आया हुआ था।  पाकिस्तान से ख़राब रिश्तों के चलते सब देश पर मर मिटने की बातें कर रहे थे। भावनाओ में आकर एक मित्रगण की आँखों से आंसू भी टपकने लगे।  सभी ने उसको चुप करवाते हुए उस गहन वार्तालाप में अपने समय के ...

क्रांति ( Poem)

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जो वक़्त दिख रहा आज वो तो सिर्फ अंश भर ही फैलाई  है  जरा इतिहास पढ़ो तो जानो देश की क्या सच्चाई  है  कितना तुमसे छुपाया गया है कितनी इसमें गहराई है  जाकर जानो उनको जिसने तुम्हारे लिए जान गवाई है  धर्म पर हमारे आघात हुआ है क्यूंकि किताबों से दूरी हमने बनाई है  अहिंसा परमो धर्मः ये बात अहिंसा वादी  गाँधी ने बताई है तो फिर धर्म हिंसा तथैव च की क्या सच्चाई है  प्राण दिए जिन शूर वीरों ने शेखर भगत आज़ाद हुए सब  फिर ये पाठ पढ़ाया किसने चरखे से आज़ादी आयी बस  कुछ तो राज़ छुपे हुए हैं हर गली हर मोहल्ले में ,  दफ़न है  इतिहास हमारा सेक्युलर के होने से   यूँ ही नहीं कोई जान दे देता इंकलाब के नारों में  कुछ तो इतिहास दबा रखा है देश के गद्दारों ने  राजनीती तो पेशा है बस मिटा दो उन हत्यारों को  बलिदान को नाम दिया मौत का जिन आतंकी प्यारों ने  बोस नीति को समझ ना पाए चरखे को सलामी है  आज़ाद हिन्द फौज तो बस आज मात्र एक कहानी है  शास्त्री जी का अंत किया ताशकंद समझौता बहाना था  देश सवाल ना पूछे अपराध पर, त...

समय और ऊर्जा

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                                                             समय और ऊर्जा का समानुपात हमारे जीवन में अत्यंत आवश्यक है।  समय अपने प्रभाव एवं गति से अग्रसर है इसको किसी भी प्रकार से रोका नहीं जा सकता ना ही इसकी गति पर नियंत्रण पाया जा जा सकता।  समय की एक विशेषता यह है कि यह आपकी परिस्थिति को नहीं देखता यह निरंतर रूप से अग्रसर रहता है।  हम दुखी हैं या खुश समय इस बात से पूर्ण रूप से अनविज्ञ है और यह अपने कार्य के प्रति पूर्ण रूप से कर्मठ एवं कार्यरत है। हमारा सोना जागना हमारी बुरी परिथियाँ हमें समय के धीरे भागने का एहसास अवश्य करवा सकते हैं लेकिन वास्तविकता में समय कभी ना ही रुकता है और ना ही धीमी गति से चलता है।  अब यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता जाता है कि अपने कार्य एवं समय के बीच कैंसे समानुपात का सामंजस्य पैदा कर सकें तांकि काम समय में अत्यधिक कार्यों को किया जा सके। यदि हमें भूख लगी हो और हमें कोई कार्य सौंप दिया ज...