क्रांति ( Poem)
जो वक़्त दिख रहा आज वो तो सिर्फ अंश भर ही फैलाई है
जरा इतिहास पढ़ो तो जानो देश की क्या सच्चाई है
कितना तुमसे छुपाया गया है कितनी इसमें गहराई है
जाकर जानो उनको जिसने तुम्हारे लिए जान गवाई है
धर्म पर हमारे आघात हुआ है क्यूंकि किताबों से दूरी हमने बनाई है
अहिंसा परमो धर्मः ये बात अहिंसा वादी गाँधी ने बताई है
तो फिर धर्म हिंसा तथैव च की क्या सच्चाई है
प्राण दिए जिन शूर वीरों ने शेखर भगत आज़ाद हुए सब
फिर ये पाठ पढ़ाया किसने चरखे से आज़ादी आयी बस
कुछ तो राज़ छुपे हुए हैं हर गली हर मोहल्ले में ,
दफ़न है इतिहास हमारा सेक्युलर के होने से
यूँ ही नहीं कोई जान दे देता इंकलाब के नारों में
कुछ तो इतिहास दबा रखा है देश के गद्दारों ने
राजनीती तो पेशा है बस मिटा दो उन हत्यारों को
बलिदान को नाम दिया मौत का जिन आतंकी प्यारों ने
बोस नीति को समझ ना पाए चरखे को सलामी है
आज़ाद हिन्द फौज तो बस आज मात्र एक कहानी है
शास्त्री जी का अंत किया ताशकंद समझौता बहाना था
देश सवाल ना पूछे अपराध पर, ताशकंद में दफनाना था
हत्या हुई हर साधु की जिसने देश हित में कार्य किये
हम गुलाम थे कल भी, आज कौन सा जाग गए
अब ना सो इतना तुम उठो जागो खड़े हो जाओ
आने वाली पीढ़ी को तो कम से कम महाराणा बना पाओ
बंदा बहादुर बनो उनके लिए जो मातृभूमि पर आघात करे
वो इतिहास पढ़ाओ बच्चों को जो योद्धा का निर्माण करे
अब ना चूको इन सब में तुम बच्चा तुम्हारी परछाई है
यूँ ही नहीं बातें हुई हैं उन बातों में कुछ तो सच्चाई है
उठो उतरो रण में अब सब, यह देश तुम्हारा है
सावरकर की तरह बदनाम हुए जो ये ना अब गंवारा है
मत भूलो उन बलिदानो को जिन्होंने देश के लिए जान गँवाई है
इतनी बातें उठती हैं यहाँ तो, कुछ तो इनमे सच्चाई है
मुहमद बिन तुगलक से लेकर औरंगजेब का इतिहास पढ़ो
लाल किया था रक्त बहा कर काशी पर किया आघात पढ़ो
टीपू की उस तलवार पर लिखा वो सन्देश तुम आज पढ़ो
कितने सबूत मिटा दिए थे बेगुनाहों का संहार पढ़ो
हिल गयी है धरती माँ अब तो इसको आज़ाद करो ,
भारत माँ के उन बेटो का अब तो यहाँ प्रचार करो
ना नपुंशक बने रहो अब उठो वीर प्रताप बनो
प्राण दिए हैं जिन वीरो ने तुम अब उनका मान रखो।

Wah superb!!
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