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फ़रवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विकास, विनाश एवं उत्तराखंड

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                                                                                    प्राकृतिक मनोहर  दृश्य , खिलखिलाती धूप , नीला आसमान , मन को निर्मलता एवं शुद्धता प्रदान करने वाली स्वच्छ हवा , आत्मा को शीतल एवं तृप्त करने वाला स्वच्छ पानी , रात को टिमटिमाते हुए तारे , रोशन पूर्णिमा चाँद का सुखद एवं ऊर्जावान एहसास , काली अँधेरी रातों में सरसराती हवा की संगीतमय ध्वनि , चिड़िया की मधुर चहचाहट , बहती नदी का तेज़ धारा प्रवाह, बुरांश के पेड़ों की दिखती लालिमा , बाँझ के पेड़ों का स्वादिष्ट पानी , सावन में रिमझिम बारिश की फुआर और पहाड़ों से झरनो के रूप में बहता पानी ,  बर्फ गिरते हुए आत्मानंद , हरियाली से चमचमाती  ऑंखें एवं प्रसन मन यह सब परिकल्पना नहीं अपितु उत्तराखंड का व्याख्यान है परन्तु थोड़ा व्यथित हूँ कि यह व्याख्यान कब तक ऐसे ही कर पाउँगा।         ...

देश के जयचंद और उनकी रणनीति

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                                      अजीब मानसिकता हो गयी है विरोधियों की।  विरोध ऐसी बातों का करना चाहिए जिनका देश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।  विरोध में अंधे होकर स्वयं की मातृभूमि के साथ विश्वास घात एवं अल्प ज्ञान की अधिकता इतनी ना हो की विरोधियों का समूल नाश करने हेतु स्वयं ईश्वर को अवतरित होना पड़े। इस देश में ऐंसा प्रतीत हो रहा मानो २६ जनवरी के बाद ही विरोधी और पागल हो गए हैं ऐंसा लग रहा है जैसे विरोधियों  की मानसिकता विक्षिप्त कुत्ते की भांति हो गयी है कि उन्हें यह भी नहीं दिखाई दे रहा कि वह क्या कर रहे हैं और क्या कह रहे हैं ?                         दीप सिद्धू जब तक पकड़ा नहीं गया था तब तक वो क्यों  फरार है और अब पकड़ा गया है तो उसे छुड़ाने की होड़ लगी है।                        ग्रेटा थनबर्ग जब तक ट्ववीट करती है तब तक ठीक जब पूरा काला चिठ्ठा भेजती है तब...

संडे फीवर एवं उन्नत्ति दिवस

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                                                                                                                                          मेरे मामाजी देहरादून से आये थे तो उनसे वार्तालाप हो रहा था बहुत बातें होने के बाद उनकी दिनचर्या का एक अंश  मुझे बहुत पसंद आया उन्होंने मुझे छोटे से शब्द में बता दिया लेकिन जब मैंने उस बारे में सोचा तो वह एक ऐसा  विषय था जिसका सम्बन्ध हर व्यक्ति  से  है।  तो आइये उस गहरे विषय पर हम भी अध्ययन करते हैं उसने वार्तालाप में शब्द निकल कर आया जो था संडे फीवर ।                                      ...

इतिहास और उसके प्रभाव

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                                                                                            हमारे द्वारा पढ़े गए इतिहास और वर्तमान  जीवन में चल रही बातों के हमारे मन मस्तिष्क पर बहुत गहरा असर होता है जिसका उदाहरण अगर आज देखें तो चल रहे विरोधों में देखा जा सकता है।  हमने जो इतिहास पढ़ा वह हमेशा आक्रांताओं और देश द्रोहियों का  पढ़ा जिसका हमारे लिए कोई अस्तित्व नहीं।  यह जानते हुऐ भी कि ये सब आक्रमणकारी  थे हम सब उनको पढ़ते भी  हैं और हमें उनके बारे में याद  भी रखना पड़ता है।  इतिहास का  हिस्सा वो लोग बनते हैं जो आपके लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ करते हैं जो आपके हितों को अपने  जीवन के उद्देश्य बनाते हैं लेकिन आज के भारत में इतने असहनीय और पीड़ा कारक  इतिहास को पढ़ना कहाँ तक उचित है।  हमारे देश के लिए...

विद्रोह और कारण

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                                                                                                                      आजकल चल रहे विद्रोह का बहुत गहराई से अध्यन कर रहा हूँ कि यह विद्रोह क्यों प्रायोजित किया जा रहा है और इसमें हर किसी की सक्रियता इतनी ज्यादा क्यों हैं ? यह जानने का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि अब तक यह विद्रोह मात्र विदेशी धरतियों पर हुआ करते थे फिर अचानक इन विद्रोह को भारत की आवश्यकता क्यों होने लगी ? यह मात्र सत्ता परिवर्तन का खेल हैं या उससे भी ज्यादा या फिर अंतर्राष्टीय स्तर पर भारत की उपलब्धियों को धूमिल कर हमारे देश को गृहयुद्ध में झोकना एक मात्र उद्देश्य है।   भारत में कुछ ऐसी स्थितियां पहले से भी देखने को मिली हैं लेकिन उनको इतने बड़े रूप में परिवर्तित होते नहीं देखा है...

धर्मनिरपेक्षता एवं अकारण द्वेष

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                             यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण , विशाल  एवं संवेदनशील विषय है। धर्मनिपेक्षता का सही भावार्थ सर्व धर्म सदभाव एवं सर्व धर्म सम्मान।  पहले इसको समझते हैं कि हमारे मूल संविधान में धर्मनिरपेक्ष आया कहाँ से कब आया और इसकी आवश्यकता मात्र स्वार्थ सिद्ध करना था या कुछ और।                                         हमारे  संविधान में लिखा जो लिखा गया है वह " हम भारत के लोग भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक ,न्याय , विचार , अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना कि स्वतंत्रता , प्रतिष्ठा और अवसर कि समता प्राप्त करवाने के लिए  तथा उनमे व्यक्ति कि गरिमा  और राष्ट्र कि एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ने के लिए दृढ  संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज ...