विकास, विनाश एवं उत्तराखंड
प्राकृतिक मनोहर दृश्य , खिलखिलाती धूप , नीला आसमान , मन को निर्मलता एवं शुद्धता प्रदान करने वाली स्वच्छ हवा , आत्मा को शीतल एवं तृप्त करने वाला स्वच्छ पानी , रात को टिमटिमाते हुए तारे , रोशन पूर्णिमा चाँद का सुखद एवं ऊर्जावान एहसास , काली अँधेरी रातों में सरसराती हवा की संगीतमय ध्वनि , चिड़िया की मधुर चहचाहट , बहती नदी का तेज़ धारा प्रवाह, बुरांश के पेड़ों की दिखती लालिमा , बाँझ के पेड़ों का स्वादिष्ट पानी , सावन में रिमझिम बारिश की फुआर और पहाड़ों से झरनो के रूप में बहता पानी , बर्फ गिरते हुए आत्मानंद , हरियाली से चमचमाती ऑंखें एवं प्रसन मन यह सब परिकल्पना नहीं अपितु उत्तराखंड का व्याख्यान है परन्तु थोड़ा व्यथित हूँ कि यह व्याख्यान कब तक ऐसे ही कर पाउँगा। ...