विद्रोह और कारण
आजकल चल रहे विद्रोह का बहुत गहराई से अध्यन कर रहा हूँ कि यह विद्रोह क्यों प्रायोजित किया जा रहा है और इसमें हर किसी की सक्रियता इतनी ज्यादा क्यों हैं ? यह जानने का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि अब तक यह विद्रोह मात्र विदेशी धरतियों पर हुआ करते थे फिर अचानक इन विद्रोह को भारत की आवश्यकता क्यों होने लगी ? यह मात्र सत्ता परिवर्तन का खेल हैं या उससे भी ज्यादा या फिर अंतर्राष्टीय स्तर पर भारत की उपलब्धियों को धूमिल कर हमारे देश को गृहयुद्ध में झोकना एक मात्र उद्देश्य है। भारत में कुछ ऐसी स्थितियां पहले से भी देखने को मिली हैं लेकिन उनको इतने बड़े रूप में परिवर्तित होते नहीं देखा है लेकिन आज अगर यह हो रहा है तो क्या हमने अपने देश कर्तवयों को भुला कर मात्र अपना स्वार्थ करने हेतु ये सब गढ़ दिया है। विदेशों में प्रायोजित इस तरह के विद्रोह का मूल्यांकन करके मैंने जो पाया वह आश्चर्य चकित करने वाला था। वहां जब जब ऐसा हुआ तब तब सत्ता परिवर्तन के साथ साथ उन देशों की आर्थिक एवं क्षमता में भरी गिरावट आयी तो कहीं यह इसी गिरावट को लाने हेतु प्रायोजित विद्रोह तो नहीं। कहीं आंदोलन की बाढ़ आना इस बात का संकेत तो नहीं कि हमें अभी संभलने की जरूरत है नहीं तो जो हम पाने वाले हैं उसे पहले ही खो दें।
अभी इसी किसान आंदोलन में किसान नवनीत सिंह की मौत पर हुए राजनीती के बारे में पढ़ रहा था बहुत सोचने के बाद समझ आया कि पुलिस मार खाती रही लेकिन गोली नहीं चलायी उसका कारण अब समझ आ रहा था। अब सोचिये जिसकी मौत ट्रैक्टर के नीचे दबने से हुई उसकी मौत को पुलिस द्वारा मृत घोषित करवाने पर बुद्धिजीवियों और वामपंथियों ने जितनी मेहनत की वह किसलिए की ? क्या मानसिकता थी उनकी कि उसकी मौत से राजनीती कर इस देश में ऐंसा वातावरण तैयार किया जाये कि हर राज्य इसकी आग में जले ? हर जगह गृहयुद्ध की स्थिति पैदा कर दी जाये ताकि इस देश की सत्ता को कभी भी पलट कर अपने हाथों में ले लिया जाये। इस आंदोलन को ठीक वही दिशा दी जा रही है जो हम विदेशी धरती पर सुनते आ रहे थे। क्या हम भारतीय मूल धारा और विचार वसुधैव कुटुम्बकम् को भूलते जा रहे हैं जो वाक्य स्वयं संसद के अंदर विराजमान है और जो हमारे उपनिषद एवं ग्रंथों में लिपिबद्ध है ? क्या हम उस सांस्कृतिक विचार धारा को उन लोगों के लिए भूलते जा रहे है जिनका उद्देश्य केवल अपने स्वार्थों को सिद्ध करना है ? अब हमें इनको पहचान कर उनके खिलाफ कुछ करने की आवश्यकता है जो लोग इस देश को विद्रोह की आग में जला देना चाहते हैं। सरकार जनता द्वारा चुनी गयी है इसका मतलब ऐसे लोगों की गिनती बहुत कम है जो विद्रोहियों की विचार धारा के हों अतः अपनी ताकत को पहचान कर उनका पूर्ण रूप से विरोध करें जो भी हमें भ्रमित कर इस देश को विद्रोह के हवाले कर रहे हैं। वो इस देश का वातावरण सिर्फ इसलिए बिगाड़ रहें हैं क्यूंकि उनको इसकी उन्नत्ति नहीं स्वयं की उन्नत्ति चाहिए। अभी मैंने रजत जी का एक ट्वीट पढ़ा अच्छा लगा और इस लेख से सम्बन्ध भी रखता है तो आपके साथ बाँट रहा हूँ।
मिलकर बैठे हैं, महफ़िल में जुगनू सारे,
एलान ये है कि, सूरज को हटाया जाये
अब इससे समझ जाइये कि इस समय एक ऐंसा नेता है आपके पास जो निरंतर आपके लिए कार्यरत है और सिर्फ और सिर्फ आपके लिए देश को दिशा देने हेतु कार्यरत है। जो काम करेगा उससे गलतियां होना स्वाभाविक है हाँ हो सकता है कोई काम गलत हो जाये तो इसमें घबराइए नहीं नहीं बल्कि पूर्ण रूप से समर्थन दीजिये। ग्लास उसी से टूटता है जो ग्लास साफ करता है देखने वाला तो हमेशा यही कहेगा मैं देख रहा था तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था। निक्कमे नेताओ से बढ़िया है कि ऐसा नेता हो जो अपना सारा समय आपके लिए न्यौछावर कर दे। हम सब कुछ जानते हैं लेकिन आंख बंद करके रखना चाहते हैं ऑंखें खोलिये हम लोग वही लोग हैं जिन्होंने ५००० साल पहले ही बता दिया था कि हम वैज्ञानिक हैं हम लोगों का पूरा इतिहास वैज्ञानिक रहा है फिर हम इतने कमजोर कैंसे हो गए की आज हम अपनी आजीविका के लिए दूसरों पर दोष मढ़ने लगे हैं। स्वयं को पहचानिये और अपने साथ साथ उन लोगों के हित के बारे में भी सोचिये जो आपके साथ जुड़े हैं। आप में योग्यता है सब कुछ करने की बस थोड़ा जरुरत है स्वयं से प्रयास करने की। जागिये और काम कीजिये दूसरों के लिए आपका हित स्वयं सुनिश्चित होगा।
मेरे जीवन से सम्बंधित एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ। मेरे एक मित्र उन दिनों लगभग खाली ही थे तो हमारा आपस में वार्तालाप हुआ और उन्होंने मेरे साथ कार्य करना शुरू किया। हम दोनों ने बहुत मेहनत की। उस कार्य में निपूर्ण होते हुए भी मैं उस कार्य को सही दिशा में नहीं ले कर जा पा रहा था और हमारी मेहनत का परिणाम हमें नहीं मिल पा रहा था जिसके लिए सम्पूर्ण रूप से मैं स्वयं उत्तरदायी था क्यूंकि उस कार्य की जानकारी उन्हें थी नहीं, और मुझे होते हुए भी मैं उसे फलीभूत नहीं कर पा रहा था। मैं जो उन्हें दे रहा था वह इतना कम था कि मैं स्वयं उसको समझता था लेकिन फिर भी मैं उनकी जरुरत को पूरा नहीं कर पा रहा था। हमारे कार्य फलीभूत नहीं हो रहे थे तो जो भी मैं उन्हें दे रहा था वो स्वयं से ही था। मुझे बहुत बुरा लगता लेकिन मैं इतना असहाय महसूस कर रहा था कि कुछ कर ही नहीं पा रहा था। एक दिन हमारे बीच वार्तालाप हुआ और हम दोनों ने अलग होने का परस्पर निष्कर्ष निकाला। हम दोनों ने एक दूसरे को समझा और कार्यों के मार्ग अलग कर लिए । हम दोनों के ही मन में कोई ऐसी भावना उत्पन्न नहीं हुए जिसके कारण हम दोनों के बीच कोई मतफेद हो और हम आज भी एक अच्छे मित्र की तरह साथ हैं। यह इसलिए संभव हो पाया कि हम दोनों ने एक दूसरे की परिस्थिति को समझा और एक दूसरे के लिए सोचा। हम एक दूसरे के लिए कार्यरत थे और दिल से जुड़े थे तो मतभेद पैदा न होना स्वाभाविक था। सबसे बड़ी बात कि हम दोनों के बीच कोई और नहीं था जो मतभेद पैदा करता और न ही हमने अपने रिश्ते को इस स्थिति तक पहुँचने दिया।
इस कहानी से मैं आपको यही समझाना चाहता हूँ कि अगर मोदीजी को बहुमत के साथ भेजा है तो विश्वास कीजिये। हम लोगों के बीच जिस तरह आज इतने मतभेद पैदा किये जा रहे वह हम लोगों को ही क्षति पहुंचाएंगे। ऐंसा नेता और नेतृत्व सदियों में एक बार पैदा होता है। विश्वास और सम्मान बना कर रखें एवं प्रतिद्वंदियों को उचित प्रतिउत्तर देकर चुप करने का पूर्ण प्रयास करें क्यूंकि आपकी चुप्पी आपको भी प्रतिद्वंदी बना सकती है। अपने नेतृत्व पर विश्वास कर उसको हर संभव सक्षम बनाने का प्रयास निरंतर करते रहे। हम सबको अलग अलग अनुभव होते हैं और हम अनुभवों का लाभ अपने कार्यो में लेते हैं उन्हें उस काम का अच्छा अनुभव है तो उनके द्वारा किये गए कार्यों पर संदेह न करें जैंसा कि अभी हुआ है। तथाकथित किसान आंदोलन में गोली चलवाना बड़ी बात नहीं थी जेसे १९८८ में चलवाई गयी थी परन्तु आज अगर गोलियां नहीं चली तो उसमे भी सरकार के उद्देशय को समझने का प्रयास करें कि वह गृहयुद्ध एवं अपनी तानाशाही नहीं चाहते। अगले लेख में मैं आपसे किसान बिल पर चर्चा करूँगा तब शायद आप समझ जाएँ की किसान बिल का इतना विरोध क्यों हो रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किन किन साजिशों को किया जा रहा है और क्यों किया जा रहा है ?
आपके स्वास्थ्य की मंगल कामना के साथ
आशीष भट्ट
सेल्स हेड - सेलब्लेस हीथकेयर प्राइवेट लिमिटेड
सदस्य - शिवालिक उत्तरांचल विकास समिति

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें