विकास, विनाश एवं उत्तराखंड
ठीक इसके विपरीत भूकंप से हुए तबाही , केदारनाथ आपदा , और चमोली में वर्तमान में हुए त्रासदी से हुए जान माल की क्षति दिल को दहला देती है। क्या सच में हम अपने पर्यावरण और चल रहे विकास के बीच का अंतर महसूस नहीं कर पा रहे ? क्या हम विकास के साथ साथ अपने पर्यावरण एवं विकास के साथ जुड़े विनाश पर सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे ? इसकी चर्चा करने से पहले हमें थोड़ा भौगोलिक एवं हमारी पर्यावरण हेतु जागरूकता को समझना होगा।
हिमालय पहाड़ के अंतर्गत आने वाले इलाकों में थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता हैं हिमालय जैसी पर्वत श्रेणियां भूभार्गीय हलचलों से बनती हैं। हिमालय की ऊंचाई अभी बढ़ने की प्रक्रिया में हैं अतः यहाँ भूकंप एवं भूस्खलन जैसे प्रक्रियाओं से हमें गुजरना पड़ सकता है। प्राकृतिक आपदाएं इस क्षेत्र में आती रही हैं और पर्वत के पूर्ण विकास तक संभावनाएं हैं कि आती रहेंगी। अतः हमें पर्यावरण एवं चल रहे विकास कार्यों में सजग एवं जागृत होना होगा। हमें अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर इन समस्याओं से छुटकारा पाना होगा। अभी तक बन रहे निर्माण कार्यों की विवेचना करूँ तो हमने सिर्फ आल वेदर रोड में अत्याधुनिक तकनीकों को देखा है। यही तकनीक हमें हर विकास पर उपयोग करनी पड़ेगी। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा सड़कों का निर्माण इतना अधिक ना हो कि उससे पहाड़ कमजोर होते चले जाएँ। पेड़ पौधों के कटान को रोक कर हमें उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने जेंसी तकनीक का उपयोग करना होगा। लगफग ७० से अधिक पावर प्रोजेक्ट्स के साथ हम उत्तराखंड में काम कर रहें है हर जगह सड़कों के जाल बिछाये जा रहे हैं। हमें विकास और विनाश के फर्क को समझना पड़ेगा और उन रास्तों पर बात करनी होगी जो इस विनाश को रोक सकें। यह कैसे संभव हो पायेगा यह हमें ही सुनिश्चित करना होगा क्यूंकि विकास भी हमारी जरुरत है। विकास के साथ विनाश न आये इसके लिए हमें सजग होकर सरकारों से बात करके ऐसी रणनीति पर काम करना होगा जिससे होने वाले विनाश को कुछ तो टाला जा सके। उत्तराखंड में लगफग १५३९ NGO हैं जिनमे से लगफग ३०% पर्यावरण क्षेत्र में कार्यरत हैं लेकिन किसी भी NGO की भूमिका प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देती। क्या हम सिर्फ फण्ड के लिए NGO चलाते हैं ? सड़के भी विकास कार्यों हेतु आवश्यक हैं परन्तु एक ही पहाड़ पर पूरी सड़कों का जाल भी अनिवार्य नहीं। गढ़वाल के पहाड़ कमजोर एवं मलवे से बने हुए है इनमे अत्यधिक निर्माण कर हम भूस्खलन हेतु स्वयं ही प्रेरित कर रहें हैं। पर्यटकों हेतु निरंतर रूप से चल रहे निर्माण अनावश्यक नदियों के समीप बस रहे गांव अनायाश ही जान माल की हानि हेतु अग्रसर हैं। हमें अपने खंडर पड़े गावों को सुनियोजित ढंग से बेहतर बना कर पर्यटकों हेतु एक आकर्षण का केंद्र बनाना होगा जिससे अनावश्यक निर्माण को भी रोका जा सके एवं पर्यटकों को एक ऐंसा माहौल दिया सके जहाँ वह गावों की सही परिभाषा एवं संस्कृति का उन्हें ज्ञान हो सके।
सड़कों के कटान पर विशेष रूप से यह ध्यान नहीं दिया जाता है कि पानी की निकासी का सही विकल्प किया जाये जिससे की जमा पानी वहीँ समाहित होकर पहाड़ो को कच्चा न करे। अगर पानी की निकासी हर सड़क पर व्यवस्थित रूप से की जाये तो शायद भूस्खलन में ५०% की कमी की जा सकती है परन्तु अभी तक आल वेदर रोड के अलावा बाकि जगह इसकी भारी कमी देखने को मिल रही है।
पेड़ पौधों के कटान लगातार होते चले जा रहे हैं परन्तु उनके विकल्पों की तलाश नहीं की जा रही न ही उनके स्थान पर अन्य पेड़ पौधों लगाने के लिए हम जागरूक हैं।
लगफग ७० से अधिक पावर प्रोजेक्ट होने की वजह से नदियां लगातार खत्म होती चली जा रही हैं जो की भूस्खलन एवं अशुद्ध जल के लिए एक भारी समस्या का रूप लेता चला जा रहा है।
अब सरकार को कुछ मानक तय करने होंगे जिससे विकास के साथ साथ विनाश के बारे में भी सोचा जा सके। मैं यह भी नहीं चाहता कि विकास न हो परन्तु ऐंसा विकास भी नहीं चाहता जो विनाश कि तरफ हमें अग्रसर करे। अतः हमें स्वयं सरकारों के साथ बात करके यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास के साथ साथ विनाश को किस तरह कम किया जा सकता है। हमें कुछ ऐंसे संगठनों कि अत्यंत आवश्यकता है जो बिना किसी विरोध के सरकार के साथ वार्तालाप कर जमीनी स्तर पर अति आवशयक विकास के साथ उन रणनीतियों पर चर्चा करे जो हमारे लिए आवश्यक हैं। मुझे यह कहने में थोड़ा भी संकोच नहीं कि गढ़वाल के विकास कार्यों हेतु पहली बार मैंने किसी सरकार को कार्यरत देखा है परन्तु मैं यह भी चाहता हूँ हमारा गढ़वाल हमारी और सरकार एवं लोगों की अनदेखी से विनाश कि भेट चढ़ जाये अतः हमें विकास के साथ साथ सरकार को हर उस परिस्थिति से अवगत करवाना होगा जिससे हम विनाश की ओर अग्रसर हैं। अब उन NGO को अपनी भूमिका निभाने की अति आवश्यकता है जो वहां के पर्यावरण हेतु कार्यरत हैं।
देव भूमि को आगे भी सुरक्षित रखने हेतु हमें प्रयासरत होना होगा हमें यह सुनिश्चित करना होगा की वहां विकास कार्यों का सही रूप में लाभ मिल सके। पलायन रोकना एवं वहां रोजगार उत्पन्न करने हेतु हमें जागरूक होना पड़ेगा।
आपके स्वास्थ्य एवं उत्तराखंड देव भूमि के उथ्थान की मंगल कामना के साथ
आशीष भट्ट
सेल्स हेड - सेलब्लेस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड
सदस्य - शिवालिक उत्तरांचल विकास समिति

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