इतिहास और उसके प्रभाव
हमारे द्वारा पढ़े गए इतिहास और वर्तमान जीवन में चल रही बातों के हमारे मन मस्तिष्क पर बहुत गहरा असर होता है जिसका उदाहरण अगर आज देखें तो चल रहे विरोधों में देखा जा सकता है। हमने जो इतिहास पढ़ा वह हमेशा आक्रांताओं और देश द्रोहियों का पढ़ा जिसका हमारे लिए कोई अस्तित्व नहीं। यह जानते हुऐ भी कि ये सब आक्रमणकारी थे हम सब उनको पढ़ते भी हैं और हमें उनके बारे में याद भी रखना पड़ता है। इतिहास का हिस्सा वो लोग बनते हैं जो आपके लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ करते हैं जो आपके हितों को अपने जीवन के उद्देश्य बनाते हैं लेकिन आज के भारत में इतने असहनीय और पीड़ा कारक इतिहास को पढ़ना कहाँ तक उचित है। हमारे देश के लिए किसने क्या किया यह जानना महत्वपूर्ण है क्यूंकि हमारी सोच का सामजिक स्तर यही बातें बनाती हैं। अब समझिये की कोई फिल्म हम देख रहें है तो उसमे एक किरदार ऐसा होगा जो पूरी फिल्म में होगा और उसको पूरी फिल्म में देख कर हम उसके बारे में ही चर्चा करते हैं और उसको भूल नहीं पाते जबकि उस फिल्म में पूरी टीम का कार्य होता है लेकिन उसको ऐसा अभिनय दे दिया जाता है जो उसको केंद्र बिंदु बनाये और पूरी फिल्म में वही अभिनय आपको नज़र आये। ठीक इसी तरह हमारा इतिहास बना दिया गया है बाबर , चिस्ती ,गौरी ,गजनबी, अकबर, हुमायूँ ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको केंद्रबिंदु बना कर वह इतिहास बनाया गया। अब इसमें चाहे भूमिका महाराणाप्रताप लक्ष्मी बाई भी निभा रही हों लेकिन उस अध्याय का नाम ही गलत होता है तो भूमिका और केंद्र बिंदुकोण में कौन आया। समझने की बात है कि जो आक्रमणक्रान्ता थे उनका इतिहास सिर्फ लुटेरों के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए और उनको जो स्थान मिलना चाहिए वह भारतीय वीरों के बीच मिलना चाहिए जबकि ऐंसा नहीं है। हमें यह स्पष्ट रूप से बोध होना चाहिए कि ये सब सोने की चिड़िया को लूटने आये थे और कोई लूट कर चला गया कोई नहीं लूट पाया। तो इन आक्रणकारियों का इतना बड़ा इतिहास हमारे समक्ष क्यों ? इनका हमारे देश में इतना सम्मान कि इनके नाम की सड़कों और स्मरणार्थ स्थलों का निर्माण हो जाता है। शायद इसीलिए हमारी सोच विद्रोहियों की भांति हो गयी है कि अपना नुकसान करते हुए भी हमें यह नहीं समझ आता कि यह हमें ही देना है।
आजकल एक अच्छी प्रणाली को मैंने विकसित होते देखा है उद्योगपतियों का विरोध करना। हम अपना प्रेरणाश्रोत उन लोगों को बनाते हैं जिनको विद्रोह करना ही आता है लेकिन उद्योगपतियों को गाली देना एवं उनका विद्रोह करना यह सिद्ध करता है कि उनकी सफलता से आप कितने कुंठित हैं लेकिन सही शब्दों में अगर मैं कहूं तो हमें भारत के उद्योगपतियों का इतिहास पढ़ना चाहिए की इन्होने किस संघर्ष से अपने जीवन को इतना सामर्थ्यवान बनाया है कि आज यह जो सोचते हैं वह हो जाता है।
टाटा इस उद्योग की जितनी प्रशंसा करूँ वो कम ही होगी। कुछ प्रशंसाओं के लिए शब्द नहीं होते यह उन्ही में से एक हैं हमारे देश में चार पहिया हर व्यक्ति तक पहुँचाने वाले यह एक ऐसी इंडस्ट्री है जिसने यह बताया की अगर सोच लिए जाये तो कुछ भी असंभव नहीं। आज अगर हम गाड़ी का सपना देखते हैं और उसको पूरा करते हैं तो उसके लिए जितना धन्यवाद करें वह कम है। इनकी तरह बनिए ये हैं असल जीवन के प्रेरणा श्रोत।
अम्बानी आज जिस मोबाइल फ़ोन से आप उद्योगपतियों को गाली देते हैं उसमे क्रांति लाने वाले यही हैं इतना ही नहीं आप इंटरनेट इतना सस्ता इस्तेमाल कर रहे हैं वह भी इनका ही दिया है। इन्ही के सस्ते इंटरनेट को इनके खिलाफ लिखने पर तो शर्म कीजिये।
बाबा रामदेव योग क्षेत्र में विश्वस्तर पर पहचान एवं आयुर्वेद में यहाँ हमारे उद्योगों को खड़ा करने में इन्ही का योगदान है इनकी मेहनत और सकारात्मक सोच ने इन्हे एक सफल उद्योगपति बनाया है।
इनसे कई नाम इस सूची में हैं परन्तु मैं कुछ ही नामों के साथ आता हूँ क्यूंकि मैं अपना लेख बहुत बड़ा नहीं चाहता। अब हम अकारण ही इनके विरुद्ध कह कर अपनी ईष्यालु एवं क्षीण मानसिकता का परिचय हमेशा क्यों देते हैं ?
ये लोग हमारे प्रेणाश्रोत होने चाहिए कि हमें भी इनकी तरह सफल होकर इस देश को अपनी तरफ से कुछ देना है लेकिन हम लगे हैं देश की टांग खींचने पर कि ये सफलता के रोज़ नए आयामों को कैंसे छू रहा जिसे विश्व में कोई पूछता नहीं था आज अचानक पूरा विश्व में ये अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। हमको सपेरों वाला देश कहने वाले , हमारी परम्पराओं पर संदेह करने वाले , हमारी संस्कृति सभ्यता को गलियां देने वाले , हमारे वेद शास्त्रों को झूठा बताने वाले आज एकाएक हमसे कैसे प्रभावित हो रहे हैं इस बात से सबसे बड़ी समस्या है। यह समस्या आज इतनी बड़ी हो गयी है कि आजकल विरोध के नाम पर साजिशें होने लगी हैं। अभी देश जलाने की कभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना की। अब इनकी विचित्र मानसिकता देखिये की देश को पूर्ण रूप से वाधित करने हेतु ये कुछ भी कर सकते हैं caa के केंद्र बिंदु रहे मुस्लिम को नेताओ एवं बुद्धिजीवी वर्ग ने इस आंदोलन में सिख जाट गुर्जर एवं अन्य तरफ बढ़ाने का पूर्ण प्रयास किया लेकिन सफलता अभी तक कहीं हाथ नहीं लगी। फूट डालो और राज़ करो वाली नीति का अब तक पालन किया जा रहा है। अब जब हम सब लोग यह पहले से जानते हैं तो ऐंसा मौका देना यह हमारे विश्वास और परस्पर प्रेम भाव पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।
मैंने जिओ में कार्यरत एक कर्मी से वार्तालाप की आप विश्वास नहीं करेंगे वह जिओ कर्मी अम्बानी ग्रुप को गलियां दे रहा था यानि जहाँ से उसका घर चलता है। यह मानसिक विकृति की पराकाष्ठा है अम्बानी , अडानी ,पतंजलि , टाटा यह सब उद्योपति अपनी मेहनत और पराक्रम से आगे बढ़ें हैं इन्होने अपने अवचेतन मन पर कार्य किया और आज यह यहाँ हैं अगर मैं यह भी मान लूँ कि सरकार के सहयोग से ये लोग यहाँ हैं तो आप भी तो उनसे किसी न किसी रूप से लाभान्वित है तो फिर ईर्ष्या किस बात की।
आखिरी में यही कहूंगा इतिहास वही पढ़िए जो आपको अच्छे कार्यों की प्रेरणा दे। जिन्होंने इस देश के लिए अथक प्रयास किये हैं उनका आदर कीजिये उन्हें अच्छे शब्दों से सम्मानित कीजिए आपके शब्द सम्मान से उन्हें कुछ नहीं मिलेगा परन्तु आपको अच्छे कार्य करने हेतु प्रेरणा अवश्य मिलेगी। अपना सही इतिहास पढ़िए और बच्चों को भी सही इतिहास का महत्त्व समझाइये। यह करने से आपको क्या प्राप्त होगा यह में नहीं जनता परन्तु इतना अवश्य कह सकता हूँ कि सही इतिहास आपकी भावनाओ को संयमित कर देश प्रगति के कार्यो की प्रेरणा देगी जिससे आप भी इतिहास का हिस्सा बन सकते हैं। इस देश के उन योद्धाओं को पढ़िए जिन्होंने स्वयं को इस देश हेतु समर्पित किया है। मराठाओं ,क्षत्रियों ,ऋषि मुनियों को अपने जीवन में प्रेरणा हेतु आवश्यक बनाइये। अपने वेद शास्त्रों को पढ़िए एवं शस्त्रों को भी अपने जीवन में महत्ता दीजिये। देश के विकास मे सहयोग कीजिये। स्वयं को गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान कीजिये। अच्छे लोगों का इतिहास पढ़ क्र उन्हें अपना प्रेरणाश्रोत बनाइये एवं स्वयं इतिहास बनने का लक्ष्य निर्धारित कीजिये।
आपके अच्छे स्वास्थ्य कि मंगल कामना के साथ
आशीष भट्ट
सेल्स हेड - सेलब्लेस हीथकेयर प्राइवेट लिमिटेड
सदस्य - शिवालिक उत्तरांचल विकास समिति

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