समय और ऊर्जा
समय और ऊर्जा का समानुपात हमारे जीवन में अत्यंत आवश्यक है। समय अपने प्रभाव एवं गति से अग्रसर है इसको किसी भी प्रकार से रोका नहीं जा सकता ना ही इसकी गति पर नियंत्रण पाया जा जा सकता। समय की एक विशेषता यह है कि यह आपकी परिस्थिति को नहीं देखता यह निरंतर रूप से अग्रसर रहता है। हम दुखी हैं या खुश समय इस बात से पूर्ण रूप से अनविज्ञ है और यह अपने कार्य के प्रति पूर्ण रूप से कर्मठ एवं कार्यरत है। हमारा सोना जागना हमारी बुरी परिथियाँ हमें समय के धीरे भागने का एहसास अवश्य करवा सकते हैं लेकिन वास्तविकता में समय कभी ना ही रुकता है और ना ही धीमी गति से चलता है। अब यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता जाता है कि अपने कार्य एवं समय के बीच कैंसे समानुपात का सामंजस्य पैदा कर सकें तांकि काम समय में अत्यधिक कार्यों को किया जा सके। यदि हमें भूख लगी हो और हमें कोई कार्य सौंप दिया जाये तो उस कार्य के लिए हमारी रूचि हमारी कार्य क्षमता के काम होती है परन्तु यह भी सामानांतर सत्य है कि यही हम भोजन थोड़ा अधिक ग्रहण करते हैं तो भी हमारी कार्य क्षमता वाधित होती है। हम अपने शरीर के पूर्ण रूप से स्वामी होते हैं और हम यह भी जानते हैं कि हमारा शरीर क्या करने पर क्या प्रतिक्रिया देता है तो हम यह समझने में क्यों असफल हो जाते हैं कि हमारी कार्य क्षमता को हमारी ऊर्जा नियंत्रित करती है यदि हम अपनी ऊर्जा श्रोतो पर कार्यरत रहें तो अवश्य ही हमें अचे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
अब आवश्यक यह है कि हम अपने शरीर में होने वाले परिवर्तनों का विशेष ध्यान रख ऊर्जा के उन आयामों के बारे में सोचें जो हमारे शरीर के लिए लाभकर हैं। ऊर्जा का एक विशेष महत्त्व हमारे जीवन में है जिसका सही आंकलन करना पूर्ण रूप से हमारे बुद्धि एवं विवेक पर निर्भर होना चाहिए। अत्यधिक समय यह देखा गया है कि जब हम किसी बात विचार करते हैं और उसे अपने जीवन में दिनचर्या हेतु स्थान देते हैं तो वह उस समय के लिए भगवान हो जाता है परन्तु समय के साथ उस बात को भूलककर हम फिर से पहले की भांति आलस एवं अपनी उसी मानसिकता की ओर अग्रसर दिखाई देते हैं जबकि हमें ऊर्जा के उन श्रोतों की ओर अग्रसर रहना चाहिए जिससे हम ऊर्जावान हो सके। प्रेणादायक उन बातों को अपने जीवन में बार बार देखें एवं सुने जो आपकी ऊर्जा को सकारात्मकता की ओर अग्रसर करे एवं आपके लिए प्रेरणा बने।
समय का सदुपयोग किये बिना कोई भी अपने जीवन में अपने भाग्य की प्रकृति को तय नहीं कर सकता है तो समय को सदुपयोग करने का एक ही तरीका है कि अपनी ऊर्जाओं के काम करने के तरीकों में सकारात्मक बदलाव एवं उन तरीकों को स्वयं के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया। सरल शब्दों में अपनी इन्द्रियों को अपने वश में करना एवं अपने अनुरूप संचालित करना ही अपनी ऊर्जा को नया रूप एवं अपने वश में करना है जो भी व्यक्ति यह करने में सफल हो जाता है उसके जीवन में पूरे ब्रह्मांड की क्रिया कलाप उसके वास्तविक जीवन पर प्रभाव नहीं डालती हैं।
सद्गुरु को सुनते हुए मैंने समझा कि जब हम मानव के रूप में जन्म लेते हैं तो जीवन थोड़ा जटिल हो जाता है यदि हम जीव होते तो पेट भरा होने पर हमारा जीवन तृप्त होता परन्तु मानव रूप में जब हम भूखे होते हैं तो सिर्फ भूख ही हमारी एक समस्या होती है उस समय भूख के अलावा हमारे पास कोई समस्या नहीं होती परन्तु पेट भरने के उपरांत हमारे पास समस्याओं का पहाड़ होता है।
जिसे हम जीवन कहते हैं वह समय और ऊर्जा का एक खास संग्रह है और हमसे अधिकतर लोग इसे संभालना नहीं सीख पाते इसीलिए हम अपने जीवन को उस स्टार पर उपयोगी नहीं बना पाते जहाँ हम इस जीवन को चाहते हैं।
हम व्यर्थ कार्यों में इतने अत्यधिक उलझे हैं कि जीवन को सही रूप में परिभाषित नहीं कर पाते आप कह सकते हैं कि हमें खुशियों के लिए अपने अपने समय कि बर्बादी का भी सहारा लेना पड़े तो हम लेते हैं। हम अपना जन्म दिन बहुत धूम धाम से मानते हैं उसका कारण अब तक समझ पाना मेरे लिए संभव नहीं क्या उसकी यह वजह है कि हम अपनी एक साल और अपनी मृत्यु के करीब आ गए हैं । सच तो यही है कि हमने एक साल बिना कुछ किये व्यतीत कर लिए जिसके लिए हम खुशियां मन रहे होते हैं परन्तु यह नहीं सोचते कि हम बिना कुछ किये हुए अपनी मृत्यु के करीब आ गए हैं। समय की प्रकृति की सच्चाई यह है कि आप यह पढ़ते हुए भी अपने मृत्यु के उतने करीब जा रहें है जितना समय आप यहाँ दे रहे तो सोचिये दिन भर आप किन कार्यों हेतु अपने समय को अपनी मृत्यु की ओर अग्रसर कर रहे हैं समय को हम नियंत्रत नहीं कर सकते हम स्वयं को नियंत्रित कर समय को उपयोगी बना सकते हैं।
अतः हमारे जीवन में समय और ऊर्जा के संग्रह का समानुपात बनाना अति आवश्यक है हमारे विचार हमारे समय एवं ऊर्जा के सामानांतर होना हमारे प्रभावशाली होने का एक मात्र साधन है।
आशीष भट्ट
सेल्स हेड - सेलब्लेस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड

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