राजनीति और हमारा धर्म

                                   दुखद और भावविभोर कर देने वाली घटना पर अब सबकी टिप्पणियां आने लगी  हैं सब स्वयं को निर्दोष और देश भक्त साबित करने  में लग  गए।  योगेंद्र यादव जिन्होंने  पहले कहा कि किसान गणतंत्र दिवस पर परेड करेगा पहली बार सारे  के सारे  बेरिकेट  खुलेंगे और हम दिल्ली के अंदर जायेंगे।  आंदोलन अब और तीखा और जोरदार होगा और हिंसा होने के बाद कहा कि दुखद और निंदनीय घटना है। इसी शृंखला में राहुल गांधी , गुरुनाम सिंह चढूनी , अरुण बनकर , राकेश टिकैत, युद्धवीर सिंह, हन्नान मोल्लाह इत्यादि तथाकथित किसान नेताओ ने पूर्ण रूप से भड़काऊ  भाषण दिए।  चेतावनियां दी और ललकारा कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता। इन्होने पूरा प्रयास किया कि सरकार  गोलियां चलवाये और उससे इनकी राजनीती को  एक नया आयाम मिले। दिल्ली को तबाह करने से भी भयानक विचार  थे इनके जो सफल नहीं हो सके जिसके लिए मैं सुरक्षा कर्मियों एवं सरकार के धैर्य का दिल से अभिवादन करता हूँ। 


                                               अब सोचिये कि उन लोगों का मानसिक स्तर कितना घटिया एवं उपद्रवी प्रवृति का होगा जो ये जानते हुए भी कि सुरक्षा कर्मियों के पास आधुनिक  हथियार भी हैं और तब भी उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे। वह दृश्य बहुत  विचलित करने वाला था जहाँ सुरक्षा कर्मी हाथ जोड़े उनके सामने नतमस्तक थे लेकिन मैं यह सोच कर गौरवान्वित हुआ कि उनके हाथ में सब कुछ होते हुए भी  उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया।  मैं हाथ जोड़कर नमन करता हूँ ऐसे योद्धओं  को जो इतने देश भक्त हैं कि अपनी मृत्यु सामने देख कर भी देश भक्ति में लिप्त थे और और उन अराजक तत्वों पर बल प्रयोग नहीं किया। मैं सरकार का भी हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ जिन्होंने बॉर्डर को इतने सालों  से सुरक्षित कर रखा है और देश में इस तरह के प्रोगात्मक देशद्रोह पर अपनी सत्ता का नशा दिखा कर कोई अमानवीय कार्य नहीं किया।  उन तथाकथित खरीदे किसानों और किसान नेताओं को स्वयं पर इतना घमंड हो गया  कि उन्होंने राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा को भी अपने मद के सामने अपमानित कर दिया। 


                                     अब जरा विषयों पर सोचते हैं  किसानो के बीच किसान सी ए ए में मुस्लिम हितैषी और हर उस स्थान पर पाया जाना जहाँ देश विरोधी तत्व एकत्रित होता है वहां इनकी उपस्थिति क्या दर्शाती है क्या यह हमारी समझ से बाहर का विषय है या हम इन समस्याओं पर बात नहीं करना चाहते।  ऐसे लोगों कि बहुत बड़ी सूची है ।  क्या हमें इनका विरोध कर इन्हे शांत नहीं करवाना चाहिए ? क्या हमें सरकार को यह विश्वास  नहीं दिलाना चाहिए कि इस कार्य में हम सरकार के साथ हैं ? 


                                इनको इन देश विरोधी घटनाओं से कुछ तो लाभ होता होगा जो इस तरह के कृत्य बार बार दोहराये जाते हैं।  इनका स्वाभिमान समाप्त  हो चुका है।  इनकी मानसिक स्थिति इतनी क्षीण हो गयी है कि यह कुछ भी कर सकते हैं।  हम आज बॉर्डर पर सुरक्षित हैं एवं २०१४ के बाद से अब तक आतंवादी  घटनाओ पर पूर्णतया नियंत्रण पा लिया गया है।  जो सम्मान हमें विश्वस्तर पर मिलना चाहिए था वह आज हमें प्राप्त होने लगा है परन्तु देख रहा हूँ कि देश के अंदर विद्रोह पैदा कर इन स्थितिओं को नकारात्मक  बनाने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है। १९८४ दंगों में भी इतना विद्रोह मैंने नहीं सुना जो अब हो  रहा है जबकि  तब यह  विद्रोह होना चाहिए था लेकिन नहीं हम प्रगतिशील हैं इसलिए विद्रोह हो रहा देश में उत्पन्न समस्याओं का निवारण हो रहा है इसलिए विद्रोह  हो रहा हैं।  राम मंदिर , ट्रिपल तलाक , सी ए ए , एन आर सी , ३७० , अगला  संभावित यूनिफार्म सिविल कोड क्या इस तरह के परिवर्तन जो हमारे लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्या यही इन विद्रोह के कारण तो नहीं बनते जा रहे।  

                                अब बात करता हूँ किसान कानूनों की।  हम कृषि प्रधान देश हैं यदि किसानो के लिए कार्य किया गया तो आज किसान इस स्थिति में क्यों हैं ? और यदि उनके लिए कानून बना कर कुछ किया जा रहा तो विरोध क्यों है ? मैंने इस विषय को पढ़ा तो समझा कि इस विरोध में उन लोगों की अच्छी संख्या है जो इसमें दलाली करके लगफग १८००  करोड़ रुपये बनाते थे यानि सिर्फ दलाली  ही इन्हे  सालाना १८००  करोड़ रुपये दे जाती है ।  आप भी इस विषय को गंभीरता से अवश्य पढ़ें एवं उन बिंदुओं पर सोचें जहाँ हमारे देश की उन्नति हो  आज आपके मोबाइल पर सब कुछ उपलब्ध है।  फार्मर्स पोर्टल में आपको २०१० से आंकड़े मिल जायेंगे उससे पहले के आंकड़ों के लिए आप अन्य लिंक पर भी ढूंढ सकते हैं।

  

                                              मैं वैसे इस तरह के विषय पर लिखता नहीं हूँ लेकिन २६ जनवरी ने मुझे इस पर लिखने के लिए प्रेरित किया।  यहाँ हमारी सोच में विरोधभास हो सकता है परन्तु अब मुझे इसकी तनिक भी चिंता नहीं क्यूंकि देश के  साथ दुर्व्यवहार का मतलब हमारा स्वयं का पतन होना है और मैं अपना  पतन नहीं करना चाहता।  मैं भी आप लोगों कि तरह मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर हूँ लेकिन इस कमजोरी का लाभ देश विरोधी तत्व उठायें यह कदाचित नहीं चाहता।  हमने स्वयं के लिए सदैव ही कार्य किया है परन्तु देश हित में कार्य करने का गौरव प्राप्ति का कभी नहीं सोचा लेकिन इस विषय पर अब मैं आपसे समय समय पर बात करता रहूँगा और इसके लिए सड़को पर भी आऊंगा।  आप लोगों का प्यार और सहयोग मुझे मिलता रहे इसी आशा के साथ.............। 


आपके सफल जीवन की मंगल  कामना के साथ 










आशीष भट्ट 

मार्केटिंग मैनेजर - सेलब्लेस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड 

सदस्य - शिवालिक उत्तरांचल विकास समिति

टिप्पणियाँ

  1. जी सत्य वचन इसीलिए तथाकथित किसान लिखा गया है। आपके प्यार और शुभाशीष हेतु हदय से आभार

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