समय का अनुभव

 





                 समय कभी किसी की प्रतीक्षा नहीं करता यह सिर्फ कहा ही नहीं जाता बल्कि अटल सत्य है परन्तु एक और कटु सत्य है इस बात का आभास तब होता है जब वह निकल जाता है।  यह सब आपके जीवन का कभी ना कभी अनुभव रहा होगा।

                   वर्षों ख़राब करने के बाद भी यदि इस बात का आभास हो जाये तो आप बहुत भाग्यशाली मनुष्य है क्यूंकि कई लोगों को तो मरते दम तक  भी यह नहीं पता होता कि उनके पूर्ण जीवन में उन्होंने ऐंसा क्या नहीं किया जो उनको करना चाहिए था।  समय एक विचित्र पहेली है इसका ज्ञान प्राप्त करने हेतु एक मात्र उपाय आपका एकांत है परन्तु यह भी सत्य है कि उस एकांत को अकेलापन नाम देकर आप बहुत कुछ पाने से खो देते हैं।  एकांत स्वयं को पाने का सबसे सुगम मार्ग है।  एकांत वह मार्ग है जिससे आप स्वयं के सत्य से परिचित होते  हैं परन्तु हम एकांत को अकेलापन नाम देकर दूसरों का साथ ढूंढने लगते हैं और यही हमारी सबसे बड़ी चूक होती है। 

                जीवन का सही अर्थ स्वयं को समझना एवं दूसरों के हितार्थ कार्य करना है आपका विकास एवं सफलता स्वयं आपके सामने आकर खड़ी हो जाएगी।  इस दिशा में कार्यरत लोग कभी भी स्वयं में दिशा हीन नहीं होते बल्कि वह कार्यकुशल एवं अनुभवी लोगों में स्वयं को विद्ययमान कर लेते हैं। समय एक ऐसा चक्र है जिस चक्र को समझना इतना आसान नहीं परन्तु यदि समझ आ गया तो एक एक क्षण स्वयं के  सुखद समय की अनुभूति होती है। सत्य थोड़ा सरल नहीं होता परन्तु सत्य जानना स्वयं के लिए गए निर्णयों की सही दिशा अवश्य निर्धारित करता है।  जीवन को एकल मार्ग पर ले जाना कदाचित अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी, यह समय और परिस्थितियां निर्धारित करती हैं कि कौन सा मार्ग समयानुसार सही या गलत है  हमें तो बस निरंतर अपने कार्यों में प्रयत्नशील रहना पड़ता है। विषम परिस्थितियों में भी अच्छा करना यह बोध करवाता है कि आपने समय के चक्र को समझ कर स्वयं को प्राप्त कर लिया है। 

अकस्मात्, किन्तु, परन्तु ऐसे शब्दों की परिकल्पना से दूर होना ही स्वयं के ज्ञान होने का सबसे अच्छा उदाहरण है। हम समय-समय पर समय को ही नहीं समझ कर बहुत समय नष्ट कर देते हैं और फिर वही समय, समय-समय पर हमें गलत करने का बोध करवाता है और फिर वही आत्मग्लानि हमे समय-समय पर अंदर से खोखला करती रहती है।

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