काल्पनिक वास्तविक एवं आध्यात्मिक

 काल्पनिक वास्तविक एवं आध्यात्मिक 


सबसे पहले हम इन तीनो विषयों को अलग अलग समझने की कोशिश करते हैं फिर उस उद्देश्य को समझेंगे जिसको ये तीनो चरितार्थ करती हैं। 


कल्पना  एक बहुत बड़ा विषय है जिस पर हम लोग बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं लेकिन सच कहूं तो इसको हम अपने जीवन में उतनी गंभीरता से नहीं  लेते जितना लेने की आवश्यकता है। हम हर कार्य को करने से पहले अपनी कल्पनाओं पर निर्भर होते हैं।  यह एक सामान्य घटना है क्यूंकि कल्पनाओ का जन्म हमारा मस्तिष्क करता है और मस्तिष्क को दिया गया कार्य ही कल्पना बनता है अथार्त कह सकते हैं कि हमारे जीवन में घट रही घटनाओं का निर्माण हमारे मस्तिष्क में होना स्वाभाविक है। अब प्रश्न यह है कि उन कल्पनाओं का ज्ञान हमें सही समय पर क्यों नहीं हो पाता ? बहुत बड़े बड़े लेखकों को पढ़ने के बाद भी इस विषय पर कुछ समझ आना मेरे लिए संभव नहीं हो पा रहा था और इसका अनुभव करने का बहुत बार प्रयास किया लेकिन अथक प्रयास के बाद भी इस विषय पर अनुभव हांसिल कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था। उस अनुभव को प्राप्त करने में जो मुझे आभास हुआ वो आपके साथ साँझा कर रहा हूँ।  

१ कल्पना का सजीव चित्रण आपके मस्तिष्क पर सकारात्मक ऊर्जा के साथ प्रदर्शित होना अनिवार्य है। 

२ उस कल्पना को प्रतिदिन  अपनी दिनचर्या में पूर्ण विश्वास के साथ स्थान दें। 

३ उस कल्पना को तब तक अपनी दिनचर्या से न हटाएँ जब तक वह सार्थक ना हो। 

वास्तविकता वह है जो हमारे साथ घट चुका है या घटित हो रहा है।  जिसको हम स्वीकारना  नहीं चाहते।  कह सकते हैं जो हमारे साथ अच्छा हो रहा उसके लिए स्वयं को और जो बुरा हो रहा उसके लिए किसी और को उत्तरदायी समझते हैं। 

आध्यात्म वह प्रक्रिया है जब बुरा हो या अच्छा दोनों ही स्थिति में हम सामान व्यव्हार को हांसिल कर लेते हैं। 

अब इन तीनो का एक साथ विश्लेषण करते है। 

कल्पना वास्तविकता को जन्म देती हैं और वास्तविकता आध्यात्मिकता को जन्म देती है। 

कल्पना को वास्तविक रूप ना दे पाने पर हम मानसिक  तनाव और अवसाद को जन्म देते हैं और मानसिक तनाव एवं अवसाद के चलते हम अध्यात्म को प्राप्त नहीं कर सकते। 


अतः किसी भी कल्पना को अगर अपने मस्तिक में स्थान देना है तो सोच समझ कर दें एवं उस प्रकार से दें जिस प्रकार से आप ईश्वर पर विश्वास कर उनको अपने घर में स्थान देते है।  आपकी कल्पनाएं ही आपके वास्तविक जीवन का प्रतिबिम्ब हैं।  हमारे पहले लेख मानसिक तनाव और अवसाद में भी कल्पना और वास्तविकता का एक महत्वपूर्ण योगदान है। 

आध्यात्म की ओर अग्रसर होकर अपनी कल्पनाओ एवं वास्तविकता को संयमता के साथ एक नया आयाम प्रदान करें। 

 सबके खुशहाल एवं मंगलमय जीवन की शुभ कामनाओं के साथ आज के लिए  इतना ही। 

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