मानसिक तनाव एवं अवसाद
आज मैं बात करूँगा सबसे अत्यधिक संवेदनशील बात पर जो की हमारा मानसिक तनाव एवं उसके द्वारा उत्तपन्न होने वाले दुष्परिणामों पर।
वैसे तो बहुत बड़े बड़े लोगों ने इस पर बात की है और बहुत कुछ बताया भी है लेकिन फिर भी हम लोग इन सब बातों पर बहुत ज्यादा संवेदनशील नज़र नहीं आते है। इसका एक बड़ा कारण हमारी दिनचर्या का अव्यवस्थित होना है। आइये इसको आसानी से समझने की कोशिश करते हैं। पहले कुछ सवाल हम खुद से करके उनके उतर ढूंढने की कोशिश करते हैं।
१- क्या हम खुद के मानसिक स्तर को व्यवस्थित रखने के लिए कुछ ऐसा करते हैं जैसा क़ि योग, प्राणायाम, ध्यान, व्यायाम ?
२- क्या जब हमें गुस्सा आता है तो हम उस समय खुद को समय देकर बोलते हैं या तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं ?
३ -क्या हमें लगता है क़ि हमें गुस्से नहीं आना चाहिए ?
४ -क्या हम गुस्से के समय उसके ना होने क़ि कल्पना करते हैं ?
५ -क्या अकस्मात् ही गुस्सा आता है ?
ऐसे बहुत सवाल आपके पास भी होंगे लेकिन उससे ज्यादा जरुरी है क़ि हम इसके समाधान क़ि तरफ आगे बढ़ें। उसके लिए कुछ सवाल फिर से हैं।
१ -हमारे गुस्से से उन परिस्थितियों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
२ -जिस व्यक्ति पर हमने गुस्सा किया और जो कहा वो कितना सही और कितना गलत था ?
३ -उन परिस्थितियों में उस व्यव्हार का हमारे सामाजिक एवं व्यवहारिक जीवन पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़े ?
४ -क्या उस परिस्थिति को हम उससे अच्छे तरीके से सामंजस्य बिठा कर समाप्त कर सकते थे ?
५ -उस परिस्थिति के दूरगामी कितने दुष्प्रभावों को हमें देखना पड़ सकता है ?
अभी ज्यादा सवालों को ना लेकर थोड़े थोड़े से ही प्रारम्भ करते हैं क्योंकि यह विषय बहुत चिंतन एवं गहनता से विचार करने का है अतएव हम इस पर आगे भी कुछ दिन चर्चा करेंगे। बस अभी ये समझना होगा क़ि हमारा गुस्सा किसी भी तरह हितकारी नहीं हो सकता।
"अवसाद, तनाव , भय और अशांति का कारण आत्म-विस्मरण और अविवेक है। अतः आनदपूर्ण जीवन के लिए आत्मानुसंधान ही श्रेयस्कर और हितकर है"।
आगे कुछ दिन मैं इसी विषय पर आपके साथ अपने अनुभव साँझा करूँगा एवं इन सब के समाधान पर आपके विचारों को सुनकर अपनी प्रोगात्मक जिंदगी में कुछ ऐसे प्रयोग करूँगा जो हमें इन परिस्थितियों में भी अनुकूल बनाये रखे। आज के लिए इतना ही जल्दी ही और विचारों के साथ 1

बहुत सुंदर सर। यह अत्यंत ही महत्पूर्ण विषय हैं क्यूंकि आज मानव समाज की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है।
जवाब देंहटाएंthankyou sir apki poems bhi atydhik gahan vishay par hoti hain.. apka aashish milta rahe
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